उत्तरकाशी। उत्तरकाशी जिले के धराली गांव में मंगलवार, 5 अगस्त 2025 को खीर गंगा में आए भीषण सैलाब ने भारी तबाही मचाई, लेकिन इस विनाश के बीच समेश्वर देवता मंदिर पूरी तरह सुरक्षित रहा।
दोपहर करीब 1:50 बजे शुरू हुआ मलबे और पानी का सैलाब देर शाम तक पांच से छह बार गांव पर कहर बरपाता रहा, जिसने धराली बाजार, होटल, दुकानें और पांडवकालीन कल्प केदार मंदिर को जमींदोज कर दिया। फिर भी, समेश्वर देवता मंदिर अडिग खड़ा रहा, जो स्थानीय लोगों के लिए आस्था और चमत्कार का प्रतीक बन गया। सैलाब ने 20-30 सेकंड में धराली बाजार को तबाह कर दिया।
खीर गंगा के दूसरी ओर बसे ग्रामीणों के घर भी मलबे की चपेट में आ गए। बॉस्केटबॉल मैदान से लेकर भागीरथी नदी के किनारे तक करीब एक किलोमीटर का क्षेत्र मलबे से पटी मैदान में तब्दील हो गया। कई लोग मलबे में दब गए, जिनकी संख्या अभी स्पष्ट नहीं है। इस विनाशकारी आपदा के बीच समेश्वर देवता मंदिर और कुछ आसपास के भवनों को कोई नुकसान नहीं पहुंचा।
प्रशासन ने इन भवनों में रह रहे लोगों को रेस्क्यू कर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा दिया। एसडीआरएफ, एनडीआरएफ और स्थानीय प्रशासन की टीमें राहत और बचाव कार्यों में युद्धस्तर पर जुटी हैं।
हाल ही में उत्तरकाशी के हर्षिल और हिमाचल के किन्नौर में बादल फटने की घटनाओं ने क्षेत्र में मानसून की भयावहता को उजागर किया है। समेश्वर देवता मंदिर का सुरक्षित रहना न केवल आस्था को मजबूत करता है, बल्कि आपदा के बीच स्थानीय लोगों के लिए उम्मीद की किरण भी बन गया है।


No comments:
Post a Comment