शिमला। आईजी समेत पूरी एसआईटी टीम को आजीवन कारावास की सजा सुनाए जाने के बाद मृतक सूरज की पत्नी का भावनात्मक बयान सामने आया है। सूरज की पत्नी ममता ने मीडिया से कहा कि -जैसे उसके पति को तड़पा-तड़पाकर मारा गया, वैसी ही सजा हत्यारों को भी मिले।
मैं उनकी उम्रकैद की सजा से संतुष्ट हूं। सूरज हत्याकांड में दो पुलिस अधिकारियों समेत आठ को उम्रकैद की सजा होने के बाद मीडिया ने फोन पर ममता से बात की। ममता ने कहा मैं दोषियों को फांसी की सजा इसलिए नहीं चाहती कि जैसे मेरे पति के बाद परिवार में हम छूट गए हैं, वैसे ही उनके भी परिवार हैं।
मैं इतनी भी स्वार्थी नहीं हूं, परिवार के सदस्य के खोने का दर्द उसे पता है। पर अपराधी जीते-जी तड़पें, जैसे मेरे पति तड़पाए गए। उनको इसलिए जीना जरूरी है। मरने के बाद तो इंसान चला जाता है और सजा पीछे छूटे लोगों को मिलती है।
ममता ने कहा कि नेपाल में शादी के दो-तीन महीने के बाद सीधे हम दिल्ली आए थे। 2013 में हम शिमला आए। फिर हलाइला गांव में बगीचे में काम करते रहे। सूरज के तीन भाई हैं। सास की मृत्यु पहले ही हो गई थी।
जब सहारे की जरूरत थी तो कोई अपने नजदीक नहीं आए। नारी सेवा सदन में सुषमा मैडम ने साढ़े चार साल तक मां और बाप बनकर मुझे सहारा दिया। मुझे बहुत प्यार दिया और बच्चे की तरह सीने लगाकर हौसला दिया। उनकी विशेष धन्यवादी हूं।


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