उत्तरकाशी। उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में मंगलवार को बादल फटने की दोहरी मार ने भयंकर तबाही मचाई। पहले धराली गांव में बादल फटने से खीरगंगा में बाढ़ ने बाजार और होटलों को तहस-नहस कर दिया, और दोपहर बाद हर्षिल में भी बादल फटने से हेलीपैड सहित आसपास का क्षेत्र बाढ़ की चपेट में आ गया। जिला प्रशासन ने धराली में 25-35 लोगों के मलबे में दबे होने और 25-30 होटल व दुकानों के बह जाने की आशंका जताई है। जिला प्रशासन ने जिले भर के स्कूलों में कल की छुट्टी की घोषणा कर दी है। जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने तत्काल आपदा कंट्रोल रूम पहुंचकर इंसीडेंट रिस्पॉन्स सिस्टम (आईआरएस) को सक्रिय किया।
देहरादून स्थित एसडीआरएफ मुख्यालय जौलीग्रांट से सेनानायक अर्पण यदुवंशी के नेतृत्व में 50 जवानों की रेस्क्यू टीम धराली के लिए रवाना की गई है। दो टीमें पहले ही घटनास्थल पर पहुंच चुकी हैं। रेस्क्यू टीमें मेडिकल किट, राशन, टेंट, कटर, थर्मल इमेजिंग कैमरा और विक्टिम लोकेशन कैमरा जैसे उपकरणों से लैस हैं। सेनानायक यदुवंशी स्वयं भी मौके पर पहुंच रहे हैं।
मौसम विभाग ने मंगलवार रात 9 बजे तक उत्तरकाशी, अल्मोड़ा, बागेश्वर, चमोली, चंपावत, नैनीताल, पिथौरागढ़, रुद्रप्रयाग और उधम सिंह नगर में भारी बारिश का रेड अलर्ट जारी किया है। धराली में पहले ही चार लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, और मलबे में दबे लोगों को निकालने के लिए सेना की हर्षिल यूनिट, पुलिस, एसडीआरएफ और एनडीआरएफ युद्धस्तर पर काम कर रही हैं। हर्षिल में हेलीपैड के आसपास भारी नुकसान की खबरें हैं।
जिले में रविवार से ही बारिश के कारण यमुनोत्री और गंगोत्री हाईवे कई जगहों पर अवरुद्ध हैं। स्यानाचट्टी के पास यमुनोत्री हाईवे का 25 मीटर हिस्सा धंस गया, और ओजरी डाबरकोट में मलबा आने से आवागमन ठप है। हाल की घटनाओं, जैसे चमोली में भूस्खलन और रुद्रप्रयाग में सड़क हादसों ने उत्तराखंड में मानसून की गंभीरता को और उजागर किया है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आपदा पर गहरा दुख जताते हुए राहत कार्यों को तेज करने के निर्देश दिए हैं। प्रशासन ने लोगों से सुरक्षित स्थानों पर रहने और अनावश्यक यात्रा से बचने की अपील की है।
धराली व हर्षिल में आपदा और मौसम विभाग के अलर्ट को देखते हुए कल बुधवार को उत्तरकाशी जिले के सभी निजी व सरकारी विद्यालयों व आंगनबाड़ी केंद्रों में अवकाश घोषित किया गया है।
UPDATE
उत्तरकाशी। उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले के धराली गांव में मंगलवार सुबह बादल फटने से खीरगंगा में भयंकर बाढ़ ने तबाही मचा दी। इस आपदा में अब तक चार लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि कई अन्य के मलबे में दबे होने की आशंका है।
जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने बताया कि पानी और मलबे का सैलाब धराली बाजार में घुस गया, जिससे कई होटल और दुकानें पूरी तरह तबाह हो गईं। गांव में चीख-पुकार मच गई, और स्थानीय लोग अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागते नजर आए। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस आपदा पर गहरा दुख जताते हुए राहत और बचाव कार्यों को युद्धस्तर पर चलाने के निर्देश दिए।
एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, सेना की हर्षिल यूनिट, पुलिस और जिला प्रशासन की टीमें भटवाड़ी के लिए रवाना हो चुकी हैं। उत्तराखंड आपदा प्रबंधन विभाग ने केंद्र सरकार से दो एमआई और एक चिनूक हेलिकॉप्टर राहत कार्यों के लिए मांगे हैं। इसके अलावा, भारी बारिश ने उत्तरकाशी में यातायात को भी ठप कर दिया है।
रविवार देर रात से जारी बारिश के कारण यमुनोत्री हाईवे का स्यानाचट्टी के पास करीब 25 मीटर हिस्सा धंस गया, जिससे आवागमन पूरी तरह बंद है। ओजरी डाबरकोट और पालीगाड में मलबा और बोल्डर गिरने से सड़कें अवरुद्ध हैं। गंगोत्री हाईवे भी डबराणी, नाग मंदिर और नेताला के पास मलबे के कारण कई घंटों तक बंद रहा, हालांकि बीआरओ ने इसे आंशिक रूप से खोल दिया है।
एनएच विभाग के ईई मनोज रावत ने बताया कि बारिश के कारण सड़क खोलने में चुनौतियां आ रही हैं, लेकिन छोटे वाहनों के लिए शाम तक रास्ता खोलने का प्रयास किया जा रहा है। मौसम विज्ञान केंद्र के निदेशक रोहित थपलियाल ने चेतावनी दी है कि 10 अगस्त तक प्रदेश में भारी बारिश का दौर जारी रह सकता है।
बड़कोट तहसील के बनाल पट्टी में भी भारी बारिश के कारण कुड गदेरे में उफान आने से डेढ़ दर्जन बकरियां बह गईं। प्रशासन ने जनता से सतर्क रहने और अनावश्यक यात्रा से बचने की अपील की है। इस आपदा ने उत्तराखंड में मानसून की मार को और गंभीर कर दिया है, जहां हाल ही में नैनीताल और रुद्रप्रयाग जैसे क्षेत्रों में भी भूस्खलन और बाढ़ की घटनाएं सामने आई हैं।




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