चतुष्कोणीय मुकाबले में फंसा रानीपोखरी ग्रांट पंचायत का प्रधान पद - सत्यमेव जयते

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Wednesday, July 16, 2025

चतुष्कोणीय मुकाबले में फंसा रानीपोखरी ग्रांट पंचायत का प्रधान पद



रानीपोखरी। उत्तराखंड के देहरादून जिले की रानीपोखरी ग्रांट पंचायत में इस बार पंचायत चुनाव में प्रधान पद के लिए चार प्रत्याशियों के बीच कड़ा चतुष्कोणीय मुकाबला देखने को मिल रहा है। इस पंचायत में रानीपोखरी, नागाघेर, शांतिनगर, दोनाली और भटनगरी गांव शामिल हैं, और यहां कुल लगभग 5800 मतदाता हैं। इनमें से तीन प्रत्याशी रानीपोखरी गांव से हैं, जबकि एक प्रत्याशी पंचायत के दूसरे सबसे बड़े गांव नागाघेर से है। प्रत्येक उम्मीदवार अपनी-अपनी खूबियों और रणनीतियों के साथ मतदाताओं को लुभाने में जुटा है, लेकिन मतदाता सूची में नए मतदाताओं के नाम शामिल न होने की शिकायतों ने भी इस चुनाव में नया मोड़ ला दिया है।

निवर्तमान प्रधान सुधीर रतूड़ी, जो रानीपोखरी गांव के निवासी हैं, अपने कार्यकाल में किए गए विकास कार्यों के दम पर दोबारा मैदान में हैं। युवा और ऊर्जावान सुधीर ने अपने कार्यकाल के दौरान ग्राम विकास की कई योजनाओं को लागू किया, जिसके लिए उन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई पुरस्कार भी मिले हैं। 

सड़कों का निर्माण, स्वच्छता अभियान, और ग्रामीण बुनियादी ढांचे के विकास जैसे कार्यों को वे अपनी उपलब्धियों के रूप में पेश कर रहे हैं। हालांकि, हर चुनाव में देखी जाने वाली एंटी-इन्कमबेंसी (सत्ता विरोधी लहर) उनके लिए चुनौती बन सकती है। कुछ मतदाताओं का मानना है कि उनके कार्यकाल में कुछ क्षेत्रों में अपेक्षित प्रगति नहीं हुई, जिसे विपक्षी प्रत्याशी भुनाने की कोशिश कर रहे हैं।

रानीपोखरी गांव के ही एक अन्य दिग्गज प्रत्याशी इंद्रपाल सिंह भी मैदान में हैं, जो पहले चार बार इस पंचायत के प्रधान रह चुके हैं। लंबे समय बाद फिर से चुनावी समर में उतरे इंद्रपाल का अनुभव उनकी सबसे बड़ी ताकत है। पंचायत की अधिकांश बस्तियों, खासकर पंचायत भूमि पर बसी कॉलोनियों में उनका अच्छा प्रभाव है। बुजुर्ग मतदाताओं के बीच उनकी लोकप्रियता उन्हें अन्य प्रत्याशियों से अलग करती है। 

इंद्रपाल अपने पिछले कार्यकालों में किए गए कार्यों, जैसे सामुदायिक भवनों का निर्माण और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा करने की योजनाओं को गिनाकर मतदाताओं का विश्वास जीतने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि, युवा मतदाताओं के बीच उनकी पकड़ उतनी मजबूत नहीं है, जो उनके लिए चुनौती हो सकती है।तीसरे प्रत्याशी जीवन चौहान भी रानीपोखरी गांव से हैं और वर्तमान में रानीपोखरी-1 के क्षेत्र पंचायत सदस्य हैं। 

युवा होने के कारण उनकी युवा मतदाताओं में अच्छी पकड़ है। क्षेत्र पंचायत सदस्य के रूप में उनके अनुभव ने उन्हें स्थानीय मुद्दों की गहरी समझ दी है। वे युवाओं के लिए रोजगार, शिक्षा और खेल के मैदानों जैसी सुविधाओं को बढ़ावा देने का वादा कर रहे हैं। उनकी सक्रियता और स्थानीय स्तर पर उनकी पहुंच उन्हें इस मुकाबले में एक मजबूत दावेदार बनाती है।

चौथे प्रत्याशी नागाघेर गांव के रविन्द्र बिष्ट उर्फ रवि हैं, जो भारतीय सेना से मानद कैप्टन के रूप में सेवानिवृत्त हुए हैं। पहली बार चुनावी मैदान में उतरे पूर्व फौजी रविन्द्र बिष्ट ऊर्फ रवि अपनी बेदाग छवि और सैन्य अनुशासन के दम पर मतदाताओं को आकर्षित कर रहे हैं। वे पूर्व प्रधानों की कमियों को उजागर करने के साथ-साथ पंचायत में पारदर्शिता, भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन और नई तकनीकों के उपयोग जैसे नए मुद्दों को उठा रहे हैं। 

उनकी ताजा सोच और बदलाव की अपील, खासकर युवा और मध्यम आयु वर्ग के मतदाताओं में, उन्हें एक मजबूत दावेदार बनाती है।हालांकि, इस रोमांचक मुकाबले के बीच मतदाता सूची को लेकर कई शिकायतें भी सामने आई हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई नए मतदाताओं और हाल ही में पंचायत में बसे लोगों के नाम मतदाता सूची में शामिल नहीं किए गए हैं। इस मुद्दे ने कुछ मतदाताओं में असंतोष पैदा किया है, और इसका असर मतदान के दिन देखने को मिल सकता है। 

कुछ मतदाताओं ने प्रशासन से इस दिशा में तत्काल कार्रवाई की मांग की है, ताकि सभी पात्र मतदाताओं को अपने मताधिकार का उपयोग करने का अवसर मिले।रानीपोखरी ग्रांट पंचायत का यह चुनाव न केवल चार दिग्गज प्रत्याशियों के बीच की जंग है, बल्कि यह स्थानीय मुद्दों, विकास और प्रशासनिक पारदर्शिता की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। 

मतदाता इस बार अनुभव, युवा जोश, और नई सोच के बीच चयन करेंगे। सभी की निगाहें अब मतदान के दिन पर टिकी हैं, जब यह तय होगा कि इस पंचायत का अगला प्रधान कौन होगा।

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