देहरादून। उत्तराखंड की स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के लिए राज्य सरकार ने ऐतिहासिक पहल की है। पहली बार स्वास्थ्य विभाग में स्वतंत्र आयुक्त की नियुक्ति की तैयारी शुरू हो गई है, जो विभाग की गतिविधियों पर सीधी निगरानी रखेगा।
यह कदम भ्रष्टाचार, अनियमितताओं और जन असंतोष की लगातार सामने आ रही शिकायतों के बाद उठाया गया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर मुख्य सचिव आर. राजेश कुमार और प्रमुख सचिव स्वास्थ्य ने इस दिशा में कार्यवाही तेज कर दी है।
अस्पतालों में हेल्प डेस्क से लेकर मेडिकल कॉलेजों तक सुधारात्मक ढांचा तैयार किया जा रहा है। इस बदलाव की नींव दो सामाजिक कार्यकर्ताओं, संजय कुमार पाण्डे और चंद्र शेखर जोशी की निडर लड़ाई से पड़ी है। इन दोनों ने आरटीआई, जनहित याचिकाओं और दस्तावेजी साक्ष्यों के जरिए स्वास्थ्य महानिदेशालय में भ्रष्टाचार की परतें उजागर कीं।
उनकी शिकायतें प्रधानमंत्री कार्यालय, राज्यपाल, मुख्यमंत्री, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और उच्च न्यायालय तक पहुंचीं, जिसके बाद शासन ने आयुक्त नियुक्ति का निर्णय लिया।सूत्रों के मुताबिक, ये कार्यकर्ता जल्द ही वित्तीय घोटालों, फर्जी बिलिंग और पदों के दुरुपयोग जैसे गंभीर मुद्दों पर और खुलासे करने की तैयारी में हैं।
दोनों ने सिस्टम के दबावों का सामना करते हुए भी अपनी लड़ाई जारी रखी, जिससे स्वास्थ्य विभाग में पारदर्शिता और जवाबदेही की दिशा में बड़ा बदलाव संभव हो सका।
जिलाधिकारी और स्वास्थ्य अधिकारियों ने इस पहल का स्वागत किया है। यह कदम न केवल विभागीय अनियमितताओं पर अंकुश लगाएगा, बल्कि मरीजों के अधिकारों को भी सुरक्षित करने में मददगार साबित होगा।


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